महाराष्ट्र सरकार ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत एक नया शासन निर्णय जारी किया है, जो राज्य की प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों के पोषण में सुधार के लिए है। इस निर्णय का उद्देश्य विभिन्न प्रकार के पोषण आहारों को शामिल करके विद्यार्थियों के लिए पौष्टिक और विविधता से भरपूर आहार उपलब्ध कराना है। यह योजना पहले से चल रही स्कूल मिड-डे मील योजना का विस्तार है और इसमें नए व्यंजन शामिल किए गए हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से तैयार किया जाएगा।
योजना की पृष्ठभूमि:
यह योजना 1995-96 से लागू है, जिसके तहत कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को मुफ्त में भोजन उपलब्ध कराया जाता है। सरकार का लक्ष्य है कि विद्यार्थियों को प्रति दिन 450 से 700 कैलोरी का भोजन मिले, जिसमें 12 से 20 ग्राम प्रोटीन हो। इस योजना में केंद्र सरकार अनुदान देती है और राज्य सरकार इसे लागू करती है।
नए शासन निर्णय के तहत महत्वपूर्ण बातें:
- तीन प्रकार के आहार (थ्री-कोर्स मील):
इस योजना के तहत विद्यार्थियों को तीन प्रकार के आहार दिए जाएंगे। यह भोजन ताजे फल, सब्जियों और अन्य पौष्टिक अनाज से बनेगा, जिससे छात्रों को विविधता का लाभ मिलेगा। - नए व्यंजन शामिल:
विद्यार्थियों के आहार में स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए 15 प्रकार की नई रेसिपी शामिल की गई हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- वेज पुलाव
- मसाले भात
- अंडा पुलाव
- चना पुलाव
- मोड आले हुए कडधान्य (स्प्राउट्स) इन व्यंजनों का चयन पौष्टिकता और स्थानीय स्वाद के अनुसार किया गया है।
टेबल का विश्लेषण (पृष्ठ 2):
इस शासन निर्णय में एक टेबल दिया गया है, जिसमें सभी नए व्यंजनों का विवरण और उनके पोषण तत्वों की जानकारी दी गई है। उदाहरण के लिए, कक्षा 1 से 5 के विद्यार्थियों के लिए चावल, दाल, तेल, और मसाले का इस्तेमाल किया जाएगा। एक दिन में 100 ग्राम चावल और 20 ग्राम दाल का मानक रखा गया है, जिससे बच्चों को पौष्टिक भोजन मिले। इसी तरह, कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए यह मात्रा बढ़ा दी गई है, ताकि उनकी शारीरिक जरूरतों को पूरा किया जा सके।
अन्य महत्वपूर्ण निर्देश:
- स्थानीय सामग्री का उपयोग:
यह सुनिश्चित किया गया है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अनाज और सामग्री का इस्तेमाल किया जाए, जिससे खाद्य विविधता के साथ-साथ स्थानीय कृषि को भी बढ़ावा मिले। - पोषण में सुधार के लिए ताजा सामग्री का उपयोग:
शैक्षिक परिसरों में उगाई गई ताजी सब्जियों और फलों का उपयोग बच्चों के भोजन में किया जाएगा। यह पहल न केवल छात्रों के स्वास्थ्य में सुधार करेगी, बल्कि उनके भोजन में ताजगी भी लाएगी। - अंडा और केला:
जिन विद्यार्थियों को अंडे पसंद नहीं हैं, उनके लिए विकल्प के रूप में केला दिया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी विद्यार्थी भोजन से वंचित न हो। - पोषण आहार की नियमितता:
योजना के तहत विद्यार्थियों को हर दिन अलग-अलग व्यंजन परोसे जाएंगे, ताकि उन्हें भोजन में रुचि बनी रहे। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सप्ताह के सभी दिनों में विद्यार्थियों को विविध भोजन मिले। - अंडा और शाकाहारी विकल्प:
सप्ताह में एक दिन अंडा पुलाव परोसा जाएगा, जबकि शाकाहारी विद्यार्थियों के लिए उसी दिन वेज पुलाव का विकल्प दिया जाएगा। - खास सामग्री का प्रबंधन:
खास व्यंजनों के लिए जैसे कि रोट, खीर, और नाचणी सत्व के लिए दूध पाउडर, चीनी, और सोयाबीन की व्यवस्था की जाएगी। यह सामग्री समय पर पहुंचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
शासन निर्णय के पेज नंबर 2 में दिए गए टेबल में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का विवरण दिया गया है। इस टेबल में 15 प्रकार की अलग-अलग रेसिपियों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें बच्चों के दैनिक आहार में शामिल किया जाएगा। इन व्यंजनों को कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों की शारीरिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
टेबल का विवरण:
टेबल में प्रत्येक रेसिपी का नाम दिया गया है और उनके लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की मात्रा का विवरण भी दिया गया है। उदाहरण के लिए:
- वेजिटेबल पुलाव (कक्षा 1 से 5 के लिए)
- चावल: 100 ग्राम
- मटर: 20 ग्राम
- तेल: 5 ग्राम
- मसाले, अदरक-लहसुन का पेस्ट, नमक, चीनी: स्वादानुसार
- सब्जियां (गाजर, फूलगोभी, धनिया): 50 ग्राम इसमें बताया गया है कि कैसे चावल और सब्जियों को मिलाकर पौष्टिक पुलाव तैयार किया जाएगा, जो बच्चों के लिए स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर होगा। कक्षा 6 से 8 के लिए इस पुलाव में चावल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाकर 150 ग्राम और 75 ग्राम की गई है, ताकि बड़े बच्चों को आवश्यक कैलोरी और प्रोटीन मिल सके।
- मसाले भात (कक्षा 1 से 5 के लिए)
- चावल: 100 ग्राम
- मटर: 20 ग्राम
- तेल: 5 ग्राम
- मसाले (हल्दी, गरम मसाला), नमक, धनिया: स्वादानुसार
- सब्जियां (बैंगन, धनिया): 50 ग्राम मसाले भात बच्चों को देने के लिए इसमें हल्दी, गरम मसाला और ताजे सब्जियों का उपयोग किया जाएगा, जिससे बच्चों को पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन मिलेगा।
- अंडा पुलाव (कक्षा 1 से 5 के लिए)
- चावल: 100 ग्राम
- अंडा: 1 नग
- तेल: 5 ग्राम
- मसाले (हल्दी, नमक, गरम मसाला, अदरक-लहसुन का पेस्ट, तेजपत्ता): स्वादानुसार
- सब्जियां (कांदा, धनिया): 50 ग्राम इस रेसिपी में अंडे का उपयोग किया गया है, जो प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। कक्षा 6 से 8 के लिए इस रेसिपी में चावल और अंडे की मात्रा बढ़ाई गई है।
- मोड आया हुआ कडधान्य (स्प्राउट्स)
- मूंग, चना, मटर: 10 से 15 ग्राम
- मसाले (चाट मसाला, नमक, नींबू का रस): स्वादानुसार
- सब्जियां (कांदा, धनिया, टमाटर): स्वादानुसार यह रेसिपी बच्चों को ताजे अंकुरित कडधान्य (स्प्राउट्स) का लाभ देती है, जो प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। अंकुरित अनाज बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फायदेमंद होते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- कक्षा के आधार पर भोजन की मात्रा:
कक्षा 1 से 5 के विद्यार्थियों के लिए 100 ग्राम चावल और 20 ग्राम दाल या अन्य अनाज का मानक रखा गया है, जबकि कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए इसे 150 ग्राम और 30 ग्राम किया गया है। यह इसलिए किया गया है ताकि बड़े विद्यार्थियों की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके। - प्रत्येक दिन के लिए अलग-अलग व्यंजन:
विद्यार्थियों को हर दिन अलग-अलग व्यंजन दिए जाएंगे, जिससे उन्हें विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व मिलें। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि सभी व्यंजन सप्ताह में दो बार न दोहराए जाएं। - पोषक तत्वों का संतुलन:
सभी रेसिपियों में चावल, दाल, सब्जियां, और मसालों का सही मिश्रण दिया गया है ताकि बच्चों को पर्याप्त कैलोरी और प्रोटीन मिले। इसके अलावा, अंकुरित अनाज, अंडे, और ताजे फल भी आहार में शामिल किए गए हैं, जिससे बच्चों को संपूर्ण पोषण मिल सके।
इस टेबल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को पौष्टिक और संतुलित आहार मिल सके, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास हो सके।
इस योजना का महत्त्व:
यह निर्णय महाराष्ट्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो राज्य के स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार के लिए उठाया गया कदम है। इससे न केवल विद्यार्थियों की सेहत में सुधार होगा, बल्कि उनका शैक्षिक प्रदर्शन भी बेहतर होगा। विविध और पौष्टिक भोजन उनके मानसिक और शारीरिक विकास में सहायक होगा।
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के इस नए शासन निर्णय के तहत महाराष्ट्र के स्कूलों में विद्यार्थियों को ताजे और पौष्टिक भोजन देने की व्यवस्था की गई है। स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली सामग्री और ताजे फलों और सब्जियों से बच्चों को बेहतर पोषण मिलेगा।
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